सूरह अल-फ़लक़

وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ

Wa min syarri ḥāsidin iżā ḥasad(a).

और ईर्ष्यालु की बुराई से, जब वह ईर्ष्या करे।"

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