सूरह लुक़मान

وَلَا تُصَعِّرْ خَدَّكَ لِلنَّاسِ وَلَا تَمْشِ فِى ٱلْأَرْضِ مَرَحًا ۖ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ كُلَّ مُخْتَالٍ فَخُورٍ

Wa lā tuṣa‘‘ir khaddaka lin-nāsi wa lā tamsyi fil-arḍi maraḥā(n), innallāha lā yuḥibbu kulla mukhtālin fakhūr(in).

"और लोगों से अपना रूख़ न फेर और न धरती में इतराकर चल। निश्चय ही अल्लाह किसी अहंकारी, डींग मारनेवाले को पसन्द नहीं करता

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