सूरह अस-सजदा

تَتَجَافَىٰ جُنُوبُهُمْ عَنِ ٱلْمَضَاجِعِ يَدْعُونَ رَبَّهُمْ خَوْفًا وَطَمَعًا وَمِمَّا رَزَقْنَـٰهُمْ يُنفِقُونَ

Tatajāfā junūbuhum ‘anil-maḍāji‘i yad‘ūna rabbahum khaufaw wa ṭama‘ā(n), wa mimmā razaqnāhum yunfiqūn(a).

उनके पहलू बिस्तरों से अलग रहते है कि वे अपने रब को भय और लालसा के साथ पुकारते है, और जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से ख़र्च करते है

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