सूरह मुहम्मद
أَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ ٱلْقُرْءَانَ أَمْ عَلَىٰ قُلُوبٍ أَقْفَالُهَآ
Afalā yatadabbarūnal-qur'āna am ‘alā qulūbin aqfāluhā.
तो क्या वे क़ुरआन में सोच-विचार नहीं करते या उनके दिलों पर ताले लगे हैं?
सभी आयत 38 आयत
أَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ ٱلْقُرْءَانَ أَمْ عَلَىٰ قُلُوبٍ أَقْفَالُهَآ
Afalā yatadabbarūnal-qur'āna am ‘alā qulūbin aqfāluhā.
तो क्या वे क़ुरआन में सोच-विचार नहीं करते या उनके दिलों पर ताले लगे हैं?
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