सूरह अल-हदीद

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا وَإِبْرَٰهِيمَ وَجَعَلْنَا فِى ذُرِّيَّتِهِمَا ٱلنُّبُوَّةَ وَٱلْكِتَـٰبَ ۖ فَمِنْهُم مُّهْتَدٍ ۖ وَكَثِيرٌ مِّنْهُمْ فَـٰسِقُونَ

Wa laqad arsalnā nūḥaw wa ibrāhīma wa ja‘alnā fī żurriyyatihiman-nubuwwata wal-kitāba fa minhum muhtad(in), wa kaṡīrum minhum fāsiqūn(a).

हमने नूह और इबराहीम को भेजा और उन दोनों की सन्तान में पैग़म्बरी और क़िताब रख दी। फिर उनमें से किसी ने तो संमार्ग अपनाया; किन्तु उनमें से अधिकतर अवज्ञाकारी थे

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