सूरह अल-मुम्तहिना

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِىُّ إِذَا جَآءَكَ ٱلْمُؤْمِنَـٰتُ يُبَايِعْنَكَ عَلَىٰٓ أَن لَّا يُشْرِكْنَ بِٱللَّهِ شَيْـًٔا وَلَا يَسْرِقْنَ وَلَا يَزْنِينَ وَلَا يَقْتُلْنَ أَوْلَـٰدَهُنَّ وَلَا يَأْتِينَ بِبُهْتَـٰنٍ يَفْتَرِينَهُۥ بَيْنَ أَيْدِيهِنَّ وَأَرْجُلِهِنَّ وَلَا يَعْصِينَكَ فِى مَعْرُوفٍ ۙ فَبَايِعْهُنَّ وَٱسْتَغْفِرْ لَهُنَّ ٱللَّهَ ۖ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ

Yā ayyuhan-nabiyyu iżā jā'akal-mu'minātu yubāyi‘naka ‘alā allā yusyrikna billāhi syai'aw wa lā yasriqna wa lā yaznīna wa lā yaqtulna aulādahunna wa lā ya'tīna bibuhtāniy yaftarīnahū baina aidīhinna wa arjulihinna wa lā ya‘ṣīnaka fī ma‘rūfin fabāyi‘hunna wastagfir lahunnallāh(a), innallāha gafūrur raḥīm(un).

ऐ नबी! जब तुम्हारे पास ईमानवाली स्त्रियाँ आकर तुमसे इसपर 'बैअत' करे कि वे अल्लाह के साथ किसी चीज़ को साझी नहीं ठहराएँगी और न चोरी करेंगी और न व्यभिचार करेंगी, और न अपनी औलाद की हत्या करेंगी और न अपने हाथों और पैरों को बीच कोई आरोप घड़कर लाएँगी. और न किसी भले काम में तुम्हारी अवज्ञा करेंगी, तो उनसे 'बैअत' ले लो और उनके लिए अल्लाह से क्षमा की प्रार्थना करो। निश्चय ही अत्यन्त बहुत क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है

📝 टिप्पणी
715) यहाँ झूठ गढ़ने से तात्पर्य उस बच्चे के बारे में झूठा दावा करने से है जो वास्तव में उसके पति का नहीं है, लेकिन वे उसे उसके पति से जोड़ देती हैं (उसका वंश पति से मान लेती हैं)।

सभी आयत 13 आयत
आज ही पढ़ना शुरू करें

क़ुरआन पढ़ना अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। क़ुरआन टुडे आपको विकर्षणों के बिना पढ़ना जारी रखने में मदद करता है, एक सरल, तेज़, निजी और आरामदायक अनुभव के साथ।