सूरह अल-जिन्न
لِّنَفْتِنَهُمْ فِيهِ ۚ وَمَن يُعْرِضْ عَن ذِكْرِ رَبِّهِۦ يَسْلُكْهُ عَذَابًا صَعَدًا
Linaftinahum fīh(i), wa may yu‘riḍ ‘an żikri rabbihī yasluk-hu ‘ażāban ṣa‘adā(n).
ताकि हम उसमें उनकी परीक्षा करें। और जो कोई अपने रब की याद से कतराएगा, तो वह उसे कठोर यातना में डाल देगा
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