सूरह अबस

قُتِلَ ٱلْإِنسَـٰنُ مَآ أَكْفَرَهُۥ

Qutilal-insānu mā akfarah(ū).

विनष्ट हुआ मनुष्य! कैसा अकृतज्ञ है!

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