सूरह अत-तारिक़
وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلرَّجْعِ
Was-samā'i żātir-raj‘(i).
साक्षी है आवर्तन (उलट-फेर) वाला आकाश,
📝 टिप्पणी
753) 'रज्अ' (Raj‘) का अर्थ है 'चक्र में वापस आना'। वर्षा को रज्अ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पृथ्वी से हवा (वायुमंडल) में उठने वाली भाप से बनती है, फिर पृथ्वी पर गिरती है, फिर से ऊपर भाप बनकर उठती है, फिर वापस पृथ्वी पर गिरती है, और यही क्रम निरंतर चलता रहता है।
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