सूरह अल-लैल
وَمَا لِأَحَدٍ عِندَهُۥ مِن نِّعْمَةٍ تُجْزَىٰٓ
Wa mā li'aḥadin ‘indahū min ni‘matin tujzā.
और हाल यह है कि किसी का उसपर उपकार नहीं कि उसका बदला दिया जा रहा हो,
📝 टिप्पणी
758) इसका अर्थ यह है कि संयमी (परहेज़गार) लोग दूसरों की सहायता इसलिए नहीं करते कि उन लोगों ने उन पर कोई उपकार किया था जिसका बदला चुकाना आवश्यक हो, बल्कि वे केवल अल्लाह की प्रसन्नता (रज़ा) चाहते हैं।
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