सूरह अर-रहमान

يَسْـَٔلُهُۥ مَن فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ كُلَّ يَوْمٍ هُوَ فِى شَأْنٍ

Yas'aluhū man fis-samāwāti wal-arḍ(i), kulla yaumin huwa fī sya'n(in).

आकाशों और धरती में जो भी है उसी से माँगता है। उसकी नित्य नई शान है

सभी आयत 78 आयत
आज ही पढ़ना शुरू करें

क़ुरआन पढ़ना अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। क़ुरआन टुडे आपको विकर्षणों के बिना पढ़ना जारी रखने में मदद करता है, एक सरल, तेज़, निजी और आरामदायक अनुभव के साथ।