सूरह अत-तलाक़

وَكَأَيِّن مِّن قَرْيَةٍ عَتَتْ عَنْ أَمْرِ رَبِّهَا وَرُسُلِهِۦ فَحَاسَبْنَـٰهَا حِسَابًا شَدِيدًا وَعَذَّبْنَـٰهَا عَذَابًا نُّكْرًا

Wa ka'ayyim min qaryatin ‘atat ‘an amri rabbihā wa rusulihī fa ḥāsabnāhā ḥisāban syadīdā(n), wa ‘ażżabnāhā ‘ażāban nukrā(n).

कितनी ही बस्तियाँ हैं जिन्होंने रब और उसके रसूलों के आदेश के मुक़ाबले में सरकशी की, तो हमने उनकी सख़्त पकड़ की और उन्हें बुरी यातना दी

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