सूरह अत-तहरीम
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِىُّ لِمَ تُحَرِّمُ مَآ أَحَلَّ ٱللَّهُ لَكَ ۖ تَبْتَغِى مَرْضَاتَ أَزْوَٰجِكَ ۚ وَٱللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
Yā ayyuhan-nabiyyu lima tuḥarrimu mā aḥallallāhu lak(a), tabtagī marḍāta azwājik(a), wallāhu gafūrur raḥīm(un).
ऐ नबी! जिस चीज़ को अल्लाह ने तुम्हारे लिए वैध ठहराया है उसे तुम अपनी पत्नियों की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए क्यो अवैध करते हो? अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
📝 टिप्पणी
721) पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपनी पत्नी, यानी मारिया अल-क़िब्तिया से शारीरिक संबंध न रखने की कसम खाई थी। इस कसम के कारण, एक हलाल (जायज़) चीज़ उनके लिए वर्जित (मना) हो गई। इसलिए, इस आयत का यह अर्थ नहीं है कि पैगंबर ने हलाल के नियम को हराम में बदल दिया था।