सूरह अल-हज्ज
يَدْعُوا۟ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَا يَضُرُّهُۥ وَمَا لَا يَنفَعُهُۥ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلضَّلَـٰلُ ٱلْبَعِيدُ
Yad‘ū min dūnillāhi mā lā yaḍurruhū wa mā lā yanfa‘uh(ū), żālika huwaḍ-ḍalālul-ba‘īd(u).
वह अल्लाह को छोड़कर उसे पुकारता है, जो न उसे हानि पहुँचा सके और न उसे लाभ पहुँचा सके। यही हैं परले दर्जे की गुमराही
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