सूरह अल-हज्ज
وَهُوَ ٱلَّذِىٓ أَحْيَاكُمْ ثُمَّ يُمِيتُكُمْ ثُمَّ يُحْيِيكُمْ ۗ إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لَكَفُورٌ
Wa huwal-lażī aḥyākum, ṡumma yumītukum ṡumma yuḥyīkum, innal-insāna lakafūr(un).
और वही है जिसने तुम्हें जीवन प्रदान किया। फिर वही तुम्हें मृत्यु देता है और फिर वही तुम्हें जीवित करनेवाला है। निस्संदेह मानव बड़ा ही अकृतज्ञ है
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