सूरह ग़ाफ़िर

مِثْلَ دَأْبِ قَوْمِ نُوحٍ وَعَادٍ وَثَمُودَ وَٱلَّذِينَ مِنۢ بَعْدِهِمْ ۚ وَمَا ٱللَّهُ يُرِيدُ ظُلْمًا لِّلْعِبَادِ

Miṡla da'bi qaumi nūḥiw wa ‘ādiw wa ṡamūda wal-lażīna mim ba‘dihim, wa mallāhu yurīdu ẓulmal lil-‘ibād(i).

जैसे नूह की क़ौम और आद और समूद और उनके पश्चात्वर्ती लोगों का हाल हुआ। अल्लाह तो ऐसा नहीं कि बन्दों पर कोई ज़ुल्म करना चाहे

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