सूरह ग़ाफ़िर

يَوْمَ لَا يَنفَعُ ٱلظَّـٰلِمِينَ مَعْذِرَتُهُمْ ۖ وَلَهُمُ ٱللَّعْنَةُ وَلَهُمْ سُوٓءُ ٱلدَّارِ

Yauma lā yanfa‘uẓ-ẓālimīna ma‘żiratuhum wa lahumul-la‘natu wa lahum sū'ud-dār(i).

जिस दिन ज़ालिमों को उनका उज्र (सफ़ाई पेश करना) कुछ भी लाभ न पहुँचाएगा, बल्कि उनके लिए तो लानत है और उनके लिए बुरा घर है

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