सूरह अल-जासिया

هَـٰذَا كِتَـٰبُنَا يَنطِقُ عَلَيْكُم بِٱلْحَقِّ ۚ إِنَّا كُنَّا نَسْتَنسِخُ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ

Hāżā kitābunā yanṭiqu ‘alaikum bil-ḥaqq(i), innā kunnā nastansikhu mā kuntum ta‘malūn(a).

"यह हमारी किताब है, जो तुम्हारे मुक़ाबले में ठीक-ठीक बोल रही है। निश्चय ही हम लिखवाते रहे हैं जो कुछ तुम करते थे।"

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