सूरह अल-अहक़ाफ़

أُو۟لَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلْجَنَّةِ خَـٰلِدِينَ فِيهَا جَزَآءًۢ بِمَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ

Ulā'ika aṣḥābul-jannati khālidīna fīhā, jazā'am bimā kānū ya‘malūn(a).

वही जन्नतवाले है, वहाँ वे सदैव रहेंगे उसके बदले में जो वे करते रहे है

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