सूरह अल-अहक़ाफ़
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لِلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَوْ كَانَ خَيْرًا مَّا سَبَقُونَآ إِلَيْهِ ۚ وَإِذْ لَمْ يَهْتَدُوا۟ بِهِۦ فَسَيَقُولُونَ هَـٰذَآ إِفْكٌ قَدِيمٌ
Wa qālal-lażīna kafarū lil-lażīna āmanū lau kāna khairam mā sabaqūnā ilaih(i), wa iż lam yahtadū bihī fasayaqūlūna hāżā ifkun qadīm(un).
जिन लोगों ने इनकार किया, वे ईमान लानेवालों के बारे में कहते है, "यदि वह अच्छा होता तो वे उसकी ओर (बढ़ने में) हमसे अग्रसर न रहते।" औऱ जब उन्होंने उससे मार्ग ग्रहण नहीं किया तो अब अवश्य कहेंगे, "यह तो पुराना झूठ है!"
📝 टिप्पणी
690) काफ़िरों ने मुसलमानों का मज़ाक उड़ाते हुए कहा, "यदि यह कुरआन कोई अच्छी चीज़ होती, तो हम निश्चित रूप से उन गरीब और कमज़ोर लोगों जैसे बिलाल, 'अम्मार, सुहैब और खब्बाब से पहले इस पर ईमान ले आते।"