सूरह अल-अहक़ाफ़

وَلِكُلٍّ دَرَجَـٰتٌ مِّمَّا عَمِلُوا۟ ۖ وَلِيُوَفِّيَهُمْ أَعْمَـٰلَهُمْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ

Wa likullin darajātum mimmā ‘amilū, wa liyuwaffiyahum a‘mālahum wa hum lā yuẓlamūn(a).

उनमें से प्रत्येक के दरजे उनके अपने किए हुए कर्मों के अनुसार होंगे (ताकि अल्लाह का वादा पूरा हो) और वह उन्हें उनके कर्मों का पूरा-पूरा बदला चुका दे और उनपर कदापि ज़ुल्म न होगा

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