सूरह क़ाफ़

وَلَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ وَنَعْلَمُ مَا تُوَسْوِسُ بِهِۦ نَفْسُهُۥ ۖ وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنْ حَبْلِ ٱلْوَرِيدِ

Wa laqad khalaqnal-insāna wa na‘lamu mā tuwaswisu bihī nafsuh(ū), wa naḥnu aqrabu ilaihi min ḥablil-warīd(i).

हमने मनुष्य को पैदा किया है और हम जानते है जो बातें उसके जी में आती है। और हम उससे उसकी गरदन की रग से भी अधिक निकट है

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