सूरह क़ाफ़

وَمِنَ ٱلَّيْلِ فَسَبِّحْهُ وَأَدْبَـٰرَ ٱلسُّجُودِ

Wa minal-laili fasabbiḥhu wa adbāras-sujūd(i).

और रात की घड़ियों में फिर उसकी तसबीह करो और सजदों के पश्चात भी

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