सूरह अत-तग़ाबुन
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِنَّ مِنْ أَزْوَٰجِكُمْ وَأَوْلَـٰدِكُمْ عَدُوًّا لَّكُمْ فَٱحْذَرُوهُمْ ۚ وَإِن تَعْفُوا۟ وَتَصْفَحُوا۟ وَتَغْفِرُوا۟ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
Yā ayyuhal-lażīna āmanū inna min azwājikum wa aulādikum ‘aduwwal lakum faḥżarūhum, wa in ta‘fū wa taṣfaḥū wa tagfirū fa innallāha gafūrur raḥīm(un).
ऐ ईमान लानेवालो, तुम्हारी पत्नियों और तुम्हारी सन्तान में से कुछ ऐसे भी है जो तुम्हारे शत्रु है। अतः उनसे होशियार रहो। और यदि तुम माफ़ कर दो और टाल जाओ और क्षमा कर दो निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
📝 टिप्पणी
719) कभी-कभी पत्नी या बच्चे अपने पति या पिता को ऐसे कार्य करने के लिए बहका या उकसा सकते हैं जो धर्म द्वारा जायज़ नहीं माने जाते।