सूरह अल-मुज़्ज़म्मिल

وَذَرْنِى وَٱلْمُكَذِّبِينَ أُو۟لِى ٱلنَّعْمَةِ وَمَهِّلْهُمْ قَلِيلًا

Wa żarnī wal-mukażżibīna ulin-na‘mati wa mahhilhum qalīlā(n).

और तुम मुझे और झूठलानेवाले सुख-सम्पन्न लोगों को छोड़ दो और उन्हें थोड़ी मुहलत दो

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