सूरह अल-मुज़्ज़म्मिल
يَوْمَ تَرْجُفُ ٱلْأَرْضُ وَٱلْجِبَالُ وَكَانَتِ ٱلْجِبَالُ كَثِيبًا مَّهِيلًا
Yauma tarjuful-arḍu wal-jibālu wa kānatil-jibālu kaṡībam mahīlā(n).
जिस दिन धरती और पहाड़ काँप उठेंगे, और पहाड़ रेत के ऐसे ढेर होकर रह जाएगे जो बिखरे जा रहे होंगे
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