सूरह अन-नबा
وَجَعَلْنَا ٱلَّيْلَ لِبَاسًا
Wa ja‘alnal-laila libāsā(n).
रात को आवरण बनाया,
📝 टिप्पणी
742) रात को एक वस्त्र (لباس) कहा गया है क्योंकि उसका अंधकार संसार को उसी तरह ढक लेता है जैसे वस्त्र मनुष्य के शरीर को ढकता है।
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وَجَعَلْنَا ٱلَّيْلَ لِبَاسًا
Wa ja‘alnal-laila libāsā(n).
रात को आवरण बनाया,
📝 टिप्पणी
742) रात को एक वस्त्र (لباس) कहा गया है क्योंकि उसका अंधकार संसार को उसी तरह ढक लेता है जैसे वस्त्र मनुष्य के शरीर को ढकता है।
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