सूरह अल-इन्शिक़ाक

وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ

Wa ażinat lirabbihā wa ḥuqqat.

और वह अपने रब की सुनेगी, और उसे यही चाहिए भी

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