सूरह अल-फ़ज्र
وَلَا تَحَـٰٓضُّونَ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ
Wa lā taḥāḍḍūna ‘alā ṭa‘āmil-miskīn(i).
और न मुहताज को खिलान पर एक-दूसरे को उभारते हो,
सभी आयत 30 आयत
وَلَا تَحَـٰٓضُّونَ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ
Wa lā taḥāḍḍūna ‘alā ṭa‘āmil-miskīn(i).
और न मुहताज को खिलान पर एक-दूसरे को उभारते हो,
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