सूरह अन-नूर

۞ ٱللَّهُ نُورُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ مَثَلُ نُورِهِۦ كَمِشْكَوٰةٍ فِيهَا مِصْبَاحٌ ۖ ٱلْمِصْبَاحُ فِى زُجَاجَةٍ ۖ ٱلزُّجَاجَةُ كَأَنَّهَا كَوْكَبٌ دُرِّىٌّ يُوقَدُ مِن شَجَرَةٍ مُّبَـٰرَكَةٍ زَيْتُونَةٍ لَّا شَرْقِيَّةٍ وَلَا غَرْبِيَّةٍ يَكَادُ زَيْتُهَا يُضِىٓءُ وَلَوْ لَمْ تَمْسَسْهُ نَارٌ ۚ نُّورٌ عَلَىٰ نُورٍ ۗ يَهْدِى ٱللَّهُ لِنُورِهِۦ مَن يَشَآءُ ۚ وَيَضْرِبُ ٱللَّهُ ٱلْأَمْثَـٰلَ لِلنَّاسِ ۗ وَٱللَّهُ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمٌ

Allāhu nūrus-samāwāti wal-arḍ(i), maṡalu nūrihī kamisykātin fīhā miṣbāḥ(un), al-miṣbāḥu fī zujājah(tin), az-zujājatu ka'annahā kaukabun durriyyuy yūqadu min syajaratim mubārakatin zaitūnatil lā syarqiyyatiw wa lā garbiyyah(tin), yakādu zaituhā yuḍī'u wa lau lam tamsashu nār(un), nūrun ‘alā nūr(in), yahdillāhu linūrihī may yasyā'(u), wa yaḍribullāhul-amṡāla lin-nās(i), wallāhu bikulli syai'in ‘alīm(un).

अल्लाह आकाशों और धरती का प्रकाश है। (मोमिनों के दिल में) उसके प्रकाश की मिसाल ऐसी है जैसे एक ताक़ है, जिसमें एक चिराग़ है - वह चिराग़ एक फ़ानूस में है। वह फ़ानूस ऐसा है मानो चमकता हुआ कोई तारा है। - वह चिराग़ ज़ैतून के एक बरकतवाले वृक्ष के तेल से जलाया जाता है, जो न पूर्वी है न पश्चिमी। उसका तेल आप है आप भड़का पड़ता है, यद्यपि आग उसे न भी छुए। प्रकाश पर प्रकाश! - अल्लाह जिसे चाहता है अपने प्रकाश के प्राप्त होने का मार्ग दिखा देता है। अल्लाह लोगों के लिए मिशालें प्रस्तुत करता है। अल्लाह तो हर चीज़ जानता है।

📝 टिप्पणी
518) ताक या आला (मिशकात) दीवार में बना हुआ एक ऐसा स्थान या गड्ढा है जो दूसरी तरफ खुला नहीं होता, जिसका उपयोग आमतौर पर दीपक या अन्य सामान रखने के लिए किया जाता है। 519) वह जैतून का पेड़ पहाड़ी की चोटी पर उगता है। उस पेड़ को सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक धूप मिलती है, जिससे वह खूब फलता-फूलता है और उसके फल से उत्तम श्रेणी का तेल प्राप्त होता है।

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