सूरह अन-नूर

وَٱلَّذِينَ يَرْمُونَ أَزْوَٰجَهُمْ وَلَمْ يَكُن لَّهُمْ شُهَدَآءُ إِلَّآ أَنفُسُهُمْ فَشَهَـٰدَةُ أَحَدِهِمْ أَرْبَعُ شَهَـٰدَٰتٍۭ بِٱللَّهِ ۙ إِنَّهُۥ لَمِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ

Wal-lażīna yarmūna azwājahum wa lam yakul lahum syuhadā'u illā anfusuhum fa syahādatu aḥadihim arba‘u syahādātim billāh(i), innahū laminaṣ-ṣādiqīn(a).

औऱ जो लोग अपनी पत्नियों पर दोषारोपण करें औऱ उनके पास स्वयं के सिवा गवाह मौजूद न हों, तो उनमें से एक (अर्थात पति) चार बार अल्लाह की क़सम खाकर यह गवाही दे कि वह बिलकुल सच्चा है

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