सूरह अन-नूर
وَأَقِيمُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُوا۟ ٱلزَّكَوٰةَ وَأَطِيعُوا۟ ٱلرَّسُولَ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
Wa aqīmuṣ-ṣalāta wa ātuz-zakāta wa aṭī‘ur-rasūla la‘allakum turḥamūn(a).
नमाज़ का आयोजन करो और ज़कात दो और रसूल की आज्ञा का पालन करो, ताकि तुमपर दया की जाए
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