सूरह अल-अहज़ाब
إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَـٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا
Innallāha wa malā'ikatahū yuṣallūna ‘alan-nabiyy(i), yā ayyuhal-lażīna āmanū ṣallū ‘alaihi wa sallimū taslīmā(n).
निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो
📝 टिप्पणी
620) अल्लाह सुबहानहु व ताआला की ओर से दुरूद (सलात) का अर्थ रहमत (कृपा) भेजना है, फ़रिश्तों की ओर से क्षमा की प्रार्थना करना है, और मोमिनों (ईमान वालों) की ओर से रहमत की दुआ करना है, जैसे कि अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मद कहना। 621) जैसे कि अस्सलामू अलैका अय्युहन-नबी कहना, जिसका अर्थ है 'हे नबी, आप पर सलामती हो।'