सूरह साद
إِنَّا سَخَّرْنَا ٱلْجِبَالَ مَعَهُۥ يُسَبِّحْنَ بِٱلْعَشِىِّ وَٱلْإِشْرَاقِ
Innā sakhkharnal-jibāla ma‘ahū yusabbiḥna bil-‘asyiyyi wal-isyrāq(i).
हमने पर्वतों को उसके साथ वशीभूत कर दिया था कि प्रातःकाल और सन्ध्य समय तसबीह करते रहे।
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