सूरह साद

وَوَهَبْنَا لَهُۥٓ أَهْلَهُۥ وَمِثْلَهُم مَّعَهُمْ رَحْمَةً مِّنَّا وَذِكْرَىٰ لِأُو۟لِى ٱلْأَلْبَـٰبِ

Wa wahabnā lahū ahlahū wa miṡlahum ma‘ahum raḥmatam minnā wa żikrā li'ulil-albāb(i).

और हमने उसे उसके परिजन दिए और उनके साथ वैसे ही और भी; अपनी ओर से दयालुता के रूप में और बुद्धि और समझ रखनेवालों के लिए शिक्षा के रूप में।

📝 टिप्पणी
656) पैगंबर अय्यूब (अलैहिस सलाम) कुछ समय तक त्वचा रोग (चर्म रोग) से पीड़ित रहे। उन्होंने अल्लाह सुबहानहु व ताआला से ठीक होने की प्रार्थना की। अल्लाह सुबहानहु व ताआला ने उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और उन्हें ज़मीन पर अपना पैर मारने का आदेश दिया। पैगंबर अय्यूब ने उस आदेश का पालन किया, जिसके बाद उनके पैर मारने के स्थान से पानी निकल आया। उन्होंने उस पानी से स्नान किया और उसे पिया, जिससे वे अपनी बीमारी से ठीक हो गए और पुनः अपने परिवार से मिल सके। बाद में उनका परिवार (वंश) पहले की संख्या से दोगुना बढ़ गया। एक समय पैगंबर अय्यूब को अपनी वह क़सम याद आई जो उन्होंने अपनी बीमारी के दौरान अपनी पत्नी को (ठीक होने पर) मारने की खाई थी, क्योंकि बीमारी की हालत में उनकी पत्नी से उनकी सेवा करने में कुछ लापरवाही हो गई थी। लेकिन, अपनी पत्नी के प्रति मन में दया और प्रेम उत्पन्न होने के कारण वे उस क़सम को पूरा करने से झिझकने लगे। अतः आयत 44 में अल्लाह सुबहानहु व ताआला का मार्गदर्शन (निर्देश) उतरा कि वे अपनी पत्नी को चोट पहुँचाए बिना भी अपनी क़सम पूरी कर सकते हैं, और वह इस तरह कि उन्हें घास के एक गट्ठर (सींकों के मुट्ठे) से मार लें।

सभी आयत 88 आयत
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