सूरह अल-हुजुरात

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تُقَدِّمُوا۟ بَيْنَ يَدَىِ ٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ ۖ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌ

Yā ayyuhal-lażīna āmanū lā tuqaddimū baina yadayillāhi wa rasūlihī wattaqullāh(a), innallāha samī‘un ‘alīm(un).

ऐ ईमानवालो! अल्लाह और उसके रसूल से आगे न बढो और अल्लाह का डर रखो। निश्चय ही अल्लाह सुनता, जानता है

📝 टिप्पणी
698) इसका अर्थ यह है कि मोमिनों (आस्थावानों) को किसी भी मामले में तब तक कोई कानून या फैसला नहीं तय करना चाहिए जब तक कि अल्लाह और उसके रसूल (पैगंबर) का कोई फैसला न आ जाए, उन मामलों में जिनमें अल्लाह या उसके रसूल की ओर से स्पष्टीकरण (स्पष्ट आदेश) आने की संभावना हो।

सभी आयत 18 आयत
आज ही पढ़ना शुरू करें

क़ुरआन पढ़ना अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। क़ुरआन टुडे आपको विकर्षणों के बिना पढ़ना जारी रखने में मदद करता है, एक सरल, तेज़, निजी और आरामदायक अनुभव के साथ।