सूरह अल-मुरसलात
وَٱلنَّـٰشِرَٰتِ نَشْرًا
Wan-nāsyirāti nasyrā(n).
और (बादलों को) उठाकर फैलाती है,
📝 टिप्पणी
738) इससे तात्पर्य उन फ़रिश्तों (देवदूतों) से है जो वह्य (प्रकाशना) लेकर उतरते हैं। कुछ मुफ़स्सिरों (व्याख्याकारों) का मानना है कि अन्-नाशिरात से अभिप्राय उन हवाओं से है जो वर्षा के साथ चलती हैं।
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