सूरह अल-अनफ़ाल
كَمَآ أَخْرَجَكَ رَبُّكَ مِنۢ بَيْتِكَ بِٱلْحَقِّ وَإِنَّ فَرِيقًا مِّنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ لَكَـٰرِهُونَ
Kamā akhrajaka rabbuka mim baitika bil-ḥaqq(i), wa inna farīqam minal-mu'minīna lakārihūn(a).
(यह बिल्कुल वैसी ही परिस्थित है) जैसे तुम्हारे ने तुम्हें तुम्हारे घर से एक उद्देश्य के साथ निकाला, किन्तु ईमानवालों में से एक गिरोह को यह अप्रिय लगा था
📝 टिप्पणी
305) कुछ पैगंबर के साथियों (सहाबा) को युद्ध के बाद मिले माल-ए-गनीमत (लूट के माल) के वितरण के नियमों पर आपत्ति थी, ठीक वैसे ही जैसे उन्हें अल्लाह (सुब्हानहु व तआला) द्वारा बद्र के युद्ध में भाग लेने के आदेश पर आपत्ति थी।
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