सूरह फ़ुस्सिलत

وَجَعَلَ فِيهَا رَوَٰسِىَ مِن فَوْقِهَا وَبَـٰرَكَ فِيهَا وَقَدَّرَ فِيهَآ أَقْوَٰتَهَا فِىٓ أَرْبَعَةِ أَيَّامٍ سَوَآءً لِّلسَّآئِلِينَ

Wa ja‘ala fīhā rawāsiya min fauqihā wa bāraka fīhā wa qaddara fīhā aqwātahā fī arba‘ati ayyām(in), sawā'al lis-sā'ilīn(a).

और उसने उस (धरती) में उसके ऊपर से पहाड़ जमाए और उसमें बरकत रखी और उसमें उसकी ख़ुराकों को ठीक अंदाज़े से रखा। माँग करनेवालों के लिए समान रूप से यह सब चार दिन में हुआ

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