सूरह फ़ुस्सिलत

فَقَضَىٰهُنَّ سَبْعَ سَمَـٰوَاتٍ فِى يَوْمَيْنِ وَأَوْحَىٰ فِى كُلِّ سَمَآءٍ أَمْرَهَا ۚ وَزَيَّنَّا ٱلسَّمَآءَ ٱلدُّنْيَا بِمَصَـٰبِيحَ وَحِفْظًا ۚ ذَٰلِكَ تَقْدِيرُ ٱلْعَزِيزِ ٱلْعَلِيمِ

Fa qaḍāhunna sab‘a samāwātin fī yaumaini wa auḥā fī kulli samā'in amrahā, wa zayyannas-samā'ad-dun-yā bimaṣābīḥa wa ḥifẓā(n), żālika taqdīrul-‘azīzil-‘alīm(i).

फिर दो दिनों में उनको अर्थात सात आकाशों को बनाकर पूरा किया और प्रत्येक आकाश में उससे सम्बन्धित आदेश की प्रकाशना कर दी औऱ दुनिया के (निकटवर्ती) आकाश को हमने दीपों से सजाया (रात के यात्रियों के दिशा-निर्देश आदि के लिए) और सुरक्षित करने के उद्देश्य से। यह अत्.न्त प्रभुत्वशाली, सर्वज्ञ का ठहराया हुआ है।"

📝 टिप्पणी
669) शैतानों की यह आदत है कि वे पृथ्वी पर होने वाली घटनाओं के बारे में फरिश्तों की बातचीत को छिपकर और चुराकर सुनते हैं।

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