सूरह अल-मुल्क
وَقَالُوا۟ لَوْ كُنَّا نَسْمَعُ أَوْ نَعْقِلُ مَا كُنَّا فِىٓ أَصْحَـٰبِ ٱلسَّعِيرِ
Wa qālū lau kunnā nasma‘u au na‘qilu mā kunnā fī aṣḥābis-sa‘īr(i).
और वे कहेंगे, "यदि हम सुनते या बुद्धि से काम लेते तो हम दहकती आग में पड़नेवालों में सम्मिलित न होते।"
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