सूरह अल-मुल्क
فَٱعْتَرَفُوا۟ بِذَنۢبِهِمْ فَسُحْقًا لِّأَصْحَـٰبِ ٱلسَّعِيرِ
Fa‘tarafū biżambihim, fasuḥqal li'aṣḥābis-sa‘īr(i).
इस प्रकार वे अपने गुनाहों को स्वीकार करेंगे, तो धिक्कार हो दहकती आगवालों पर!
सभी आयत 30 आयत
فَٱعْتَرَفُوا۟ بِذَنۢبِهِمْ فَسُحْقًا لِّأَصْحَـٰبِ ٱلسَّعِيرِ
Fa‘tarafū biżambihim, fasuḥqal li'aṣḥābis-sa‘īr(i).
इस प्रकार वे अपने गुनाहों को स्वीकार करेंगे, तो धिक्कार हो दहकती आगवालों पर!
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