सूरह अल-बक़रा
وَإِذَا طَلَّقْتُمُ ٱلنِّسَآءَ فَبَلَغْنَ أَجَلَهُنَّ فَلَا تَعْضُلُوهُنَّ أَن يَنكِحْنَ أَزْوَٰجَهُنَّ إِذَا تَرَٰضَوْا۟ بَيْنَهُم بِٱلْمَعْرُوفِ ۗ ذَٰلِكَ يُوعَظُ بِهِۦ مَن كَانَ مِنكُمْ يُؤْمِنُ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلْـَٔاخِرِ ۗ ذَٰلِكُمْ أَزْكَىٰ لَكُمْ وَأَطْهَرُ ۗ وَٱللَّهُ يَعْلَمُ وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
Wa iżā ṭallaqtumun-nisā'a fabalagna ajalahunna falā ta‘ḍulūhunna ay yankiḥna azwājahunna iżā tarāḍau bainahum bil-ma‘rūf(i), żālika yū‘aẓu bihī man kāna minkum yu'minu billāhi wal-yaumil-ākhir(i), żālikum azkā lakum wa aṭhar(u), wallāhu ya‘lamu wa antum lā ta‘lamūn(a).
और जब तुम स्त्रियों को तलाक़ दे दो और वे अपनी निर्धारित अवधि (इद्दत) को पहुँच जाएँ, तो उन्हें अपने होनेवाले दूसरे पतियों से विवाह करने से न रोको, जबकि वे सामान्य नियम के अनुसार परस्पर रज़ामन्दी से मामला तय करें। यह नसीहत तुममें से उसको की जा रही है जो अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान रखता है। यही तुम्हारे लिए ज़्यादा बरकतवाला और सुथरा तरीक़ा है। और अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते
📝 टिप्पणी
70) इसका तात्पर्य पुनविर्वाह (दोबारा निकाह करने) से है, चाहे वह अपने पूर्व पति से हो या किसी अन्य पुरुष से।