सूरह अल-बक़रा

فَجَعَلْنَـٰهَا نَكَـٰلًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهَا وَمَا خَلْفَهَا وَمَوْعِظَةً لِّلْمُتَّقِينَ

Faja‘alnāhā nakālal limā baina yadaihā wa mā khalfahā wa mau‘iẓatal lil-muttaqīn(a).

फिर हमने इसे सामनेवालों और बाद के लोगों के लिए शिक्षा-सामग्री और डर रखनेवालों के लिए नसीहत बनाकर छोड़ा

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