सूरह अल-बक़रा

۞ قَوْلٌ مَّعْرُوفٌ وَمَغْفِرَةٌ خَيْرٌ مِّن صَدَقَةٍ يَتْبَعُهَآ أَذًى ۗ وَٱللَّهُ غَنِىٌّ حَلِيمٌ

Qaulum ma‘rūfuw wa magfiratun khairum min ṣadaqatiy yatba‘uhā ażā(n), wallāhu ganiyyun ḥalīm(un).

एक भली बात कहनी और क्षमा से काम लेना उस सदक़े से अच्छा है, जिसके पीछे दुख हो। और अल्लाह अत्यन्कृत निस्पृह (बेनियाज़), सहनशील है

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