सूरह फ़ातिर
مَن كَانَ يُرِيدُ ٱلْعِزَّةَ فَلِلَّهِ ٱلْعِزَّةُ جَمِيعًا ۚ إِلَيْهِ يَصْعَدُ ٱلْكَلِمُ ٱلطَّيِّبُ وَٱلْعَمَلُ ٱلصَّـٰلِحُ يَرْفَعُهُۥ ۚ وَٱلَّذِينَ يَمْكُرُونَ ٱلسَّيِّـَٔاتِ لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ ۖ وَمَكْرُ أُو۟لَـٰٓئِكَ هُوَ يَبُورُ
Man kāna yurīdul-‘izzata falillāhil-‘izzatu jamī‘ā(n), ilaihi yaṣ‘adul-kalimuṭ-ṭayyibu wal-‘amaluṣ-ṣāliḥu yarfa‘uh(ū), wal-lażīna yamkurūnas-sayyi'āti lahum ‘ażābun syadīd(un), wa makru ulā'ika huwa yabūr(u).
जो कोई प्रभुत्व चाहता हो तो प्रभुत्व तो सारा का सारा अल्लाह के लिए है। उसी की ओर अच्छा-पवित्र बोल चढ़ता है और अच्छा कर्म उसे ऊँचा उठाता है। रहे वे लोग जो बुरी चालें चलते है, उनके लिए कठोर यातना है और उनकी चालबाज़ी मटियामेट होकर रहेगी
📝 टिप्पणी
631) कुछ मुफ़स्सिरों (व्याख्याकारों) के अनुसार, उस "अच्छी बात" (कलमा तय्यबा) से तात्पर्य ला इलाहा इल्लल्लाह है। हालाँकि, कुछ का यह भी कहना है कि इससे अभिप्राय अल्लाह सुबहानहु व ताआला का ज़िक्र (स्मरण) है या हर वह अच्छी बात है जो अल्लाह के लिए कही जाए।