सूरह फ़ातिर
وَمِنَ ٱلنَّاسِ وَٱلدَّوَآبِّ وَٱلْأَنْعَـٰمِ مُخْتَلِفٌ أَلْوَٰنُهُۥ كَذَٰلِكَ ۗ إِنَّمَا يَخْشَى ٱللَّهَ مِنْ عِبَادِهِ ٱلْعُلَمَـٰٓؤُا۟ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ غَفُورٌ
Wa minan-nāsi wad-dawābbi wal-an‘āmi mukhtalifun alwānuhū każālik(a), innamā yakhsyallāha min ‘ibādihil-ulamā'(u), innallāha ‘azīzun gafūr(un).
और मनुष्यों और जानवरों और चौपायों के रंग भी इसी प्रकार भिन्न हैं। अल्लाह से डरते तो उसके वही बन्दे हैं, जो बाख़बर है। निश्चय ही अल्लाह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, क्षमाशील है
📝 टिप्पणी
635) विद्वानों (उलमा) से तात्पर्य उन लोगों से है जिन्हें शरीयत (ईश्वरीय नियम) के साथ-साथ प्राकृतिक और सामाजिक घटनाओं का ज्ञान हो, जो उनके भीतर अल्लाह सुबहानहु व ताआला के प्रति सम्मान के साथ भय (ख़ौफ़) पैदा करे।