सूरह फ़ातिर
إِنَّآ أَرْسَلْنَـٰكَ بِٱلْحَقِّ بَشِيرًا وَنَذِيرًا ۚ وَإِن مِّنْ أُمَّةٍ إِلَّا خَلَا فِيهَا نَذِيرٌ
Innā arsalnāka bil-ḥaqqi basyīraw wa nażīrā(n), wa im min ummatin illā khalā fīhā nażīr(un).
हमने तुम्हें सत्य के साथ भेजा है, शुभ-सूचना देनेवाला और सचेतकर्ता बनाकर। और जो भी समुदाय गुज़रा है, उसमें अनिवार्यतः एक सचेतकर्ता हुआ है
📝 टिप्पणी
633) इस आयत में "सत्य" (हक़) से तात्पर्य एकेश्वरवाद (तौहीद) के धर्म और नियमों (क़ानूनों) से है।
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