सूरह फ़ातिर

ٱسْتِكْبَارًا فِى ٱلْأَرْضِ وَمَكْرَ ٱلسَّيِّئِ ۚ وَلَا يَحِيقُ ٱلْمَكْرُ ٱلسَّيِّئُ إِلَّا بِأَهْلِهِۦ ۚ فَهَلْ يَنظُرُونَ إِلَّا سُنَّتَ ٱلْأَوَّلِينَ ۚ فَلَن تَجِدَ لِسُنَّتِ ٱللَّهِ تَبْدِيلًا ۖ وَلَن تَجِدَ لِسُنَّتِ ٱللَّهِ تَحْوِيلًا

Istikbāran fil-arḍi wa makras-sayyi'(i), wa lā yaḥīqul-makrus-sayyi'u illā bi'ahlih(ī), fahal yanẓurūna illā sunnatal-awwalīn(a), falan tajida lisunnatillāhi tabdīlā(n), wa lan tajida lisunnatillāhi taḥwīlā(n).

हालाँकि बुरी चाल अपने ही लोगों को घेर लेती है। तो अब क्या जो रीति अगलों के सिलसिले में रही है वे बस उसी रीति की प्रतिक्षा कर रहे है? तो तुम अल्लाह की रीति में कदापि कोई परिवर्तन न पाओगे और न तुम अल्लाह की रीति को कभी टलते ही पाओगे

📝 टिप्पणी
637) पूर्ववर्ती (पहले के) लोगों के संबंध में तय किए गए नियम (जो लागू हुआ) से तात्पर्य उन लोगों पर अज़ाब (दंड) का अवतरित होना है जिन्होंने रसूलों (संदेशवाहकों) को झुठलाया था।

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