सूरह अल-मआरिज

وَلَا يَسْـَٔلُ حَمِيمٌ حَمِيمًا

Wa lā yas'alu ḥamīmun ḥamīmā(n).

कोई मित्र किसी मित्र को न पूछेगा,

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