सूरह अल-मआरिज
وَلَا يَسْـَٔلُ حَمِيمٌ حَمِيمًا
Wa lā yas'alu ḥamīmun ḥamīmā(n).
कोई मित्र किसी मित्र को न पूछेगा,
सभी आयत 44 आयत
وَلَا يَسْـَٔلُ حَمِيمٌ حَمِيمًا
Wa lā yas'alu ḥamīmun ḥamīmā(n).
कोई मित्र किसी मित्र को न पूछेगा,
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